Monday, February 23, 2009

मेरा भी बर्थ डे मना दो न

माँ मेरा भी बर्थ डे मना दो ना ,

नए कपड़े मुझे भी लाकर दो ,

एक केक कटवा दो न ।

बोली सुखिया की बेटी एक दिन ,

कुछ ऐसा जोर चला दो न ।

माँ मेरा भी बर्थ मना दो ना ...

मेरे भी मित्र आयेंगे घर पर ,

घर भी खूब सजा होगा ,

उछल कूद फ़िर खूब चलेगी

उस दिन खूब मजा होगा ।

रामू ,रेखा , सुगिया, सुकनी ,

अपने राजा को बुलवा दो न ।

माँ मेरा भी बर्थ डे मना दो न .....

जैसे सजता है मंत्री जी का घर ,

पहनती है उनकी बेटी जेवर ,

तंग गले का लाल शूट ,

माँ मुझको भी बनवा दो न ।

माँ मेरा भी बर्थ डे मना दो न .....

हूक उठी सुखिया के दिल में ,

कैसे बेटी को समझाए ,

रोटी भी जब दूभर हो तो ,

लाल शूट वह कैसे लाये ।

नादान अबोध यह क्या जाने ,

कितना रिक्त है जीवन का कोना ,

इस पर उसकी ठुनक है प्यारी ,

माँ मेरा भी बर्थ डे मना दो न ।

माँ मेरा भी बर्थ डे मना दो ना ....

माँ मेरा भी बर्थ डे मना दो न ...

7 comments:

  1. bahut hi bhaavuk !!!!!
    thank u fr visiting my blog nd encouraging me.thank u very much!!! aage bhi aatey rahiyega !!!

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  2. hridaysparshi rachna.

    welcome on my blog.

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  3. हूक उठी सुखिया के दिल में ,

    कैसे बेटी को समझाए ,

    रोटी भी जब दूभर हो तो ,

    लाल शूट वह कैसे लाये ।

    नादान अबोध यह क्या जाने ,

    कितना रिक्त है जीवन का कोना
    bahut hi sunder.

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  4. bhai bahut dino baad aaya par aakar mujhe ek achchi rachna padhne ko mili,,
    behtreen likhte ho bhai..
    blog se blog par anaa jaanaa laga rahega to aour maza aayegaa.

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  5. वैसे तो मैं इस बात का हिमायती हूँ कि भले ही कम लिखा जाय पर अच्छा लिखा जाना चाहिए. आपकी यह कविता बहुत अच्छी लगी. अब तो अगली पोस्ट आजाना चाहिए.

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  6. यह कविता बहुत ही भावपूर्ण लगी...
    एक अभिलाषा की अभिव्यक्ति सरल शब्दों में कई अर्थ समेटे हुए कविता में की गयी है.

    आप बहुत कम लिखते हैं..आप के दोनों ब्लॉग पर काफी समय से कुछ अपडेट नहीं हुआ.

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