Saturday, April 4, 2009

Khaalee Panne
Poetry, Story etc.
Sunday, April 5, 2009

तुम मुझे ऐसे ही अच्छी लगती हो
जिंदगी तुम मुझे ऐसे ही अच्छी लगती
होजिंदगी आगाज़ ,
जिंदगी परवाज़ ,
जिंदगी कल ,
जिंदगी आज
।जिंदगी हंसी ,
जिंदगी खुशी ,
जिंदगी मुस्कान ,
जिंदगी पहचान ।
जिंदगी फूल ,
जिंदगी महक,
जिंदगी हवा ,
जिंदगी चिडियों की चहक ।
जिंदगी तुम मुझे ऐसे ही अच्छी लगती हो ।
दुःख- गम , परेशानी भी तेरे ही हिस्से हैं ।
पर तुम मुझे हर रोज़एक नयी ऊर्जा भरती हो ,
जब सुबह की पहली किरण के साथ जगती हो ।
जिंदगी तुम मुझे ऐसे ही अच्छी लगती हो ।

Monday, February 23, 2009

मेरा भी बर्थ डे मना दो न

माँ मेरा भी बर्थ डे मना दो ना ,

नए कपड़े मुझे भी लाकर दो ,

एक केक कटवा दो न ।

बोली सुखिया की बेटी एक दिन ,

कुछ ऐसा जोर चला दो न ।

माँ मेरा भी बर्थ मना दो ना ...

मेरे भी मित्र आयेंगे घर पर ,

घर भी खूब सजा होगा ,

उछल कूद फ़िर खूब चलेगी

उस दिन खूब मजा होगा ।

रामू ,रेखा , सुगिया, सुकनी ,

अपने राजा को बुलवा दो न ।

माँ मेरा भी बर्थ डे मना दो न .....

जैसे सजता है मंत्री जी का घर ,

पहनती है उनकी बेटी जेवर ,

तंग गले का लाल शूट ,

माँ मुझको भी बनवा दो न ।

माँ मेरा भी बर्थ डे मना दो न .....

हूक उठी सुखिया के दिल में ,

कैसे बेटी को समझाए ,

रोटी भी जब दूभर हो तो ,

लाल शूट वह कैसे लाये ।

नादान अबोध यह क्या जाने ,

कितना रिक्त है जीवन का कोना ,

इस पर उसकी ठुनक है प्यारी ,

माँ मेरा भी बर्थ डे मना दो न ।

माँ मेरा भी बर्थ डे मना दो ना ....

माँ मेरा भी बर्थ डे मना दो न ...

Wednesday, February 18, 2009